मध्य पूर्व युद्ध के झटके को शांत करना
April 9, 2026
April 9, 2026
शुभ प्रभात।
एक लचीली विश्व अर्थव्यवस्था को अब मध्य पूर्व में रुके हुए युद्ध द्वारा फिर से परखा जा रहा है। इस संघर्ष ने दुनिया भर में काफी कठिनाइयाँ पैदा की हैं। मेरा दिल इस युद्ध और सभी युद्धों से प्रभावित सभी लोगों के लिए दुखी है।
जब हम अगले सप्ताह अपनी स्प्रिंग मीटिंगों में मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों का स्वागत करेंगे, तो हमारा ध्यान इस बात पर होगा कि इस नवीनतम झटके को कैसे झेला जाए और अर्थव्यवस्थाओं और लोगों के दर्द को कम कैसे किया जाए।
इसके लिए झटके की प्रकृति, उन माध्यमों जिनसे वह अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है, प्रभाव के आकार, और उन नीतियों को समझना आवश्यक है जो इसे कम कर सकती हैं।
तो हमें किस बात ने चोट पहुँचाई? एक आपूर्ति झटका जो:
बड़ा है, जिसमें विश्व के दैनिक तेल प्रवाह में लगभग 13 प्रतिशत और LNG के प्रवाह में 20 प्रतिशत की कटौती हुई है;
वैश्विक है, जिसमें हम सभी अब ऊर्जा के लिए अधिक भुगतान कर रहे हैं और दुनिया भर में आपूर्ति शृंखलाएँ बाधित हो गई है;
और असममित है, जिसमें इसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि आप संघर्ष के कितने निकट हैं, आप ऊर्जा निर्यातक हैं या आयातक, और आपकी नीतिगत गुंजाइश कितनी है।
हमेशा की तरह, एक नकारात्मक आपूर्ति झटका कीमतों को बढ़ा देता है। संदर्भ बिंदु के रूप में, टकराव शुरू होने से ठीक पहले ब्रेंट $72 प्रति बैरल से उछलकर $120 के शिखर पर पहुँच गया हैं। शुक्र है, कि तेल की कीमतें गिर गई हैं, लेकिन वे युद्ध से पहले की तुलना में बहुत ज़्यादा हैं। और कई देश मूल्यवान संसाधनों तक पहुँच के लिए ऊँची कीमत चुका रहे हैं।
लंबी आपूर्ति श्रृंखला के अंत में स्थित प्रशांत द्वीप राष्ट्रों के बारे में सोचें, जो इस गंभीर व्यवधान के बाद यह सोच रहे हैं कि क्या ईंधन अभी भी उन तक पहुँच पाएगा।
आपूर्ति में आई रुकावटों के—और कुछ समय तक बने रहने वाले—दूरगामी प्रभाव पड़े हैं, जैसे कि:
तेल रिफाइनरियों में अवरोध होना, क्योंकि उन्हें न्यूनतम प्रवाह दर बनाए रखने की आवश्यकता थी, जिसमें कई दूर-दराज़ स्थानों पर चेतावनी के संकेत लाल हो रहे हैं (चित्र 1);
परिष्कृत उत्पादों की कमी, जिनमें डीजल (चित्र 2a) और जेट ईंधन (2b) शामिल हैं, जिन्होंने पहले से कहीं अधिक परस्पर जुड़े हुए विश्व में परिवहन, व्यापार और पर्यटन को बाधित किया है;
परिवहन में आई समस्याओं के कारण 45 मिलियन लोगों के लिए खाद्य असुरक्षा—जिसके कारण भूख से पीड़ित लोगों की कुल संख्या 360 मिलियन से अधिक हो गई है—और उर्वरकों की ऊंची कीमतों (2c) के कारण समय के साथ स्थिति और बिगड़ने की संभावना है;
और औद्योगिक निर्भरताएँ जैसे कि सल्फर, सिलिकॉन चिप निर्माण और MRI इमेजिंग के लिए हीलियम, और प्लास्टिक के लिए नेफ्था के कारण आपूर्ति शृंखला में व्यवधान।
दूसरा सवाल यह है: यह झटका किस तरह सामने आ सकता है? तीन मुख्य चैनलों के माध्यम से:
पहला: कीमत पर असर और आपूर्ति में कमी। प्रमुख आदानों के लिए बढ़ती कीमतें कई उपभोक्ता वस्तुओं में जुड़ जाती हैं, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ जाती है। यह, कमी के साथ मिलकर, बलपूर्वक मांग को कम कर देती है।
दूसरा चैनल: मुद्रास्फीति की अपेक्षाएँ। ये अपनी स्थिरता खो सकती हैं और एक महंगी मुद्रास्फीति प्रक्रिया को भड़का सकती हैं। यहाँ अमेरिका के लिए निकट-अवधि के मुद्रास्फीति पूर्वानुमानों का विभाजन दिया गया है (चित्र 6a); ध्यान दें कि वक्र कैसे दाईं ओर चला गया है, जो उच्च अल्पकालिक मुद्रास्फीति अपेक्षाओं को दर्शाता है। और यहाँ यूरो क्षेत्र के लिए वक्र है (6b); यह भी दाईं ओर चला गया है, और चौड़ा हो जाता है, जो उच्च अनिश्चितता को दर्शाता है। सौभाग्य से, लंबी अवधि की उम्मीदों में कोई बदलाव नहीं आया है। —यह बहुत अच्छा और बहुत महत्वपूर्ण है।
तीसरा ,चैनल: वित्तीय परिस्थितियाँ। एक अत्यधिक सहायक शुरुआती बिंदु से, ये एक व्यवस्थित तरीके से कड़ी हो गई हैं। उभरते बाजारों के बॉन्ड स्प्रेड में काफी विस्तार हुआ (चित्र 7a); इक्विटी कीमतों में समायोजन हुआ (चित्र 7b); और डॉलर मजबूत हुआ (चित्र 7c)। और अब हम कुछ राहत देखते हैं।
हम पहले भी ऐसी स्थिति में रह चुके हैं, 1970 के दशक में और इसी दशक की शुरुआत में। हम जानते हैं कि अंत में इस झटके का एक बड़ा हिस्सा समाप्त हो जाएगा, और हम एक नए संतुलन की स्थिति में आ जाएंगे। आपूर्ति में सुधार होता है और मांग समायोजित हो जाती है। नई क्षमता शुरू होती है। ऊर्जा दक्षता बढ़ जाती है।
प्रमाण के रूप में, कृपया सराहना करें कि कैसे 1980 के दशक से विश्व धीरे-धीरे कम ऊर्जा-गहन होता गया है (चित्र 8a), जो इस झटके के प्रभाव को कम करता है। नवीकरणीय ऊर्जा ने अपना हिस्सा बढ़ाया, फिर भी तेल हमारा नंबर एक ईंधन बना हुआ है (8b)।
जब दुनिया इस पर प्रतिक्रिया कर रही है, तो यह महत्त्वपूर्ण है कि हम ऊर्जा दक्षता और ऊर्जा विविधीकरण के लिए अपनी सामूहिक खोज को बनाए रखें। विभिन्न देशों लिए ऊर्जा सुरक्षा के रास्ते अलग-अलग हैं, लेकिन सभी को इसके लिए प्रयास करना होगा।
अब मैं तीसरे प्रश्न की ओर बढ़ती हूँ: विकास का प्रभाव कितना बड़ा है?
उत्तर मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि क्या युद्धविराम कायम रहता है और स्थायी शांति की ओर लेकर जाता है और युद्ध अपने पीछे कितना नुकसान छोड़ता है।
अनिश्चितताओं को देखते हुए, अगले सप्ताह प्रकाशित होने वाले हमारे विश्व आर्थिक परिदृश्य (World Economic Outlook) में कई परिदृश्य शामिल होंगे, अपेक्षाकृत तेजी से सामान्य होने से लेकर, मध्यम परिदृश्य, और एक ऐसे परिदृश्य तक जिसमें तेल और गैस की कीमतें लंबे समय तक बहुत अधिक बनी रहती हैं और दूसरे-दौर के प्रभाव बने रहते हैं।
ये सभी परिदृश्य एक ऐसी स्थिति से शुरू होते हैं जहाँ मजबूत AI और तकनीकी निवेश, सहायक वित्तीय स्थितियाँ, और अन्य कारक विश्व अर्थव्यवस्था में काफी अधिक गति प्रदान कर रहे थे।
वास्तव में, यदि यह झटका न लगता, तो हम वैश्विक विकास को उन्नत बना रहे होते।
लेकिन अब, हमारे सबसे आशावादी परिदृश्य में भी विकास में गिरावट शामिल है। क्यों? महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को नुकसान, आपूर्ति में रुकावट, आत्मविश्वास की कमी, और अन्य गंभीर प्रभावों के कारण।
क़तर के रस लाफ़ान परिसर (चित्र 3) को लें—सही तरीके से किए गए रणनीतिक निवेश का एक अत्यंत महत्वपूर्ण उदाहरण; यह खाड़ी क्षेत्र के 93 प्रतिशत LNG का उत्पादन करता है, जिसमें से लगभग 80 प्रतिशत एशिया-प्रशांत को जाता है, वह क्षेत्र जो अब ईंधन की गंभीर कमी से जूझ रहा है। रस लाफ़ान अनिवार्य रूप से 2 मार्च से बंद है, 19 मार्च को इस पर सीधे हमले हुए, और इसे पूरी क्षमता पर बहाल करने में 3–5 वर्ष लग सकते हैं।
यहाँ तक कि सर्वोत्तम स्थिति में भी, पहले जैसी स्थिति में कोई साफ-सुथरी वापसी नहीं होगी।
एक और प्रासंगिक तथ्य: ध्यान दें कि लाल सागर में बाब-एल-मंदेब से होकर जहाजों का आवागमन वहाँ हुए विनाशकारी व्यवधानों से पूरी तरह कभी उबर नहीं पाया है—यह अभी भी 2023 के स्तर के लगभग आधे पर ही अटका हुआ है (चित्र 4a)।
तो वास्तविकता यह है कि, हम वास्तव में यह नहीं जानते हैं कि होर्मुज के जलडमरूमध्य से आवागमन (चित्र 4b) या, इस मामले में क्षेत्रीय हवाई यातायात की बहाली (चित्र 4c) का भविष्य क्या होगा।
हम यह जानते हैं कि विकास धीमा होगा—भले ही नई शांति टिकाऊ हो।
और हम यह भी जानते हैं कि दुनिया भर में महत्वपूर्ण भिन्नताएं हैं। वे देश जो बिना किसी बाधा के तेल और गैस का निर्यात करने में सक्षम हैं, सबसे कम प्रभावित हैं। इसके विपरीत, जो देश युद्ध से सीधे प्रभावित हुए हैं—जिनमें नाकाबंदी का सामना करने वाले तेल और गैस निर्यातक शामिल हैं—और आयातित तेल और गैस, पर निर्भर देश अभी भी प्रभाव का खामियाजा भुगत रहे हैं।
यह प्रभाव कितना गंभीर होगा, यह काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि देशों के पास कितनी नीतिगत गुंजाइश है, जिसमें तेल और गैस भंडार भी शामिल हैं, गल्फ़ से टैंकरों की आवाजाही में हमने जो पाँच हफ़्ते का अंतराल देखा है, उसे देखते हुए।
अंतर के तीन बिंदुओं का वर्णन करने के लिए मैं आपको कुछ प्रमुख चार्ट दिखाती हूँ:
सबसे पहले, आइए दुनिया को बाईं ओर तेल आयातकों और दाईं ओर तेल निर्यातकों में विभाजित करें (चित्र 5a)। जैसा कि बाईं ओर बिंदुओं का ढेर दिखाता है, 80 प्रतिशत से अधिक देश शुद्ध तेल आयातक हैं।
दूसरा, आइए उन देशों पर प्रकाश डालें जो इस युद्ध से सीधे प्रभावित हुए हैं (5b)। ध्यान दें कि कैसे प्रभाव प्रमुख तेल निर्यातकों पर असमान रूप से हुए हैं—हालाँकि बाईं ओर के लाल बिंदु हमें क्षेत्रीय गैर-तेल अर्थव्यवस्थाओं पर भी युद्ध के प्रभाव की याद दिलाते हैं।
तीसरा, आइए नीतिगत गुंजाइश के एक संकेतक के रूप में देशों की संप्रभु क्रेडिट रेटिंग के लिए एक ऊर्ध्वाधर पैमाना जोड़ें (5c)। नीचे बाएँ वह स्थान है जहाँ हम कमजोर तेल आयातक देखते हैं। आइए अब उप-सहारा अफ्रीका को पीले रंग में (5d), और छोटे द्वीपीय देशों को नारंगी रंग (5e) में दर्शाएँ। ध्यान दें कि कैसे देशों के ये दो समूह असुरक्षा वाले चतुर्थांश का अधिकांश हिस्सा बनते हैं—वे अगले सप्ताह हमारे विशेष ध्यान में रहेंगे।
फिर भी, क्योंकि तेल एक वैश्विक वस्तु है, यहाँ तक कि उन तेल निर्यातकों, जो प्रभावित क्षेत्र से दूर स्थित हैं और व्यापार की शर्तों का लाभ उठा रहे थे, ने भी अधिक महंगे तेल के प्रभाव को महसूस किया है।
अब मैं आखिरी सवाल पर आती हूँ।: देशों को क्या करना चाहिए?
शुरू में ही एक चेतावनी: क्योंकि यह एक क्लासिक नकारात्मक आपूर्ति झटका है, इसलिए मांग के समायोजन से बचा नहीं जा सकता है।
नीति-निर्माता कई तरीकों से मदद कर सकते हैं, और—निश्चित रूप से—उन्हें ध्यान रखना होगा कि स्थिति और खराब न हो। इसलिए यहां मैं सभी देशों से अपील करती हूँ कि वे अकेले आगे बढ़ने वाली कार्रवाइयों को अस्वीकार करें—निर्यात नियंत्रण, मूल्य नियंत्रण, और इसी तरह—जो वैश्विक परिस्थितियों को और अस्थिर कर सकती हैं: आग में घी न डालें।
इसके अलावा, जैसे पिछले झटकों में हुआ है, सतर्कता और चपलता अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। चुनौती यह पता लगाने की होगी कि क्या और कैसे बदलती परिस्थितियाँ हमें दुनिया की एक स्थिति से दूसरी स्थिति में ले जाएंगी:
अभी के लिए, प्रतीक्षा करना और देखना महत्वपूर्ण है, जहाँ केंद्रीय बैंक कीमतों में स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर जोर दे रहे हैं, लेकिन अन्यथा स्थिर बने हुए हैं—विश्वसनीयता पर प्रश्न उठने पर कार्रवाई की ओर अधिक झुकाव के साथ। राजकोषीय प्राधिकरणों को अपने मध्यम अवधि के राजकोषीय ढाँचों के अनुरूप कमजोर वर्गों को लक्षित और अस्थायी समर्थन प्रदान करना चाहिए।
अगला, यदि मुद्रास्फीति अपेक्षाएँ अस्थिर होने और एक महंगे मुद्रास्फीति कुंडल को जन्म देने का खतरा दिखाएँ, तो केंद्रीय बैंकों को दर वृद्धि के साथ दृढ़ता से कदम उठाना चाहिए। राजकोषीय सहायता लक्षित और अस्थायी रहनी चाहिए।। बेशक, दरों में वृद्धि विकास को और धीमा कर देगी—वे ऐसे ही काम करती हैं।
अंत में, यदि वित्तीय स्थितियों के गंभीर रूप से सख्त होने से आपूर्ति के झटके में नकारात्मक मांग का झटका जुड़ जाता है, तो मौद्रिक नीति एक नाजुक संतुलन कार्य में लौट आती है, जबकि राजकोषीय नीति—केवल और केवल यदि राजकोषीय गुंजाइश हो—अच्छी तरह से संतुलित मांग समर्थन की ओर मुड़ता है।
आइए तेज़ी से इस पर नज़र डालें कि वास्तव में क्या हो रहा है।
मौद्रिक नीति में, बाजार प्रमुख केंद्रीय बैंकों से अपने नीतिगत रुख को कड़ा करने की उम्मीद करते रहे हैं। यहाँ हम बाज़ार-आधारित नीतिगत दर के चार प्रमुख मार्ग देखते हैं, जिनमें से प्रत्येक ऊपर की ओर बदलाव दिखा रहा है (चित्र 9)।
ऊर्जा नीति में, हम देखते हैं कि कई देश आपातकालीन संरक्षण उपाय लागू कर रहे हैं—सामान्य अभियानों से लेकर, निजी वाहनों के उपयोग पर सीमाएं, और रिमोट कार्य तक। इन और अन्य कदम अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के ऊर्जा नीति ट्रैकर में अच्छी तरह से प्रलेखित हैं, जिसका यहाँ सार प्रस्तुत किया गया है (चित्र 10a)।
मैं जोड़ना चाहूँगी कि इस तरह की जानकारी को साझा करना, इस बात को रेखांकित करता है कि हमने अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी और विश्व बैंक के साथ मिलकर एक समन्वय समूह क्यों बनाया है, जिसमें IMF व्यापक आर्थिक पहलुओं का नेतृत्व करेगा।
और अंत में, राजकोषीय नीति पर वापिस आते हैं, हम देखते हैं कि अधिकांश देशों ने अलक्षित कर कटौती, ऊर्जा सब्सिडी और मूल्य-आधारित उपायों से बचते हुए, उचित रूप से संयम बनाए रखा है, हालांकि कुछ ने व्यापक-आधार पर समर्थन देने का चुनाव किया है। फिर से, यहाँ हम अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का सार देखते हैं (10b)।
हम यह बात सामने रखेंगे कि जो उपाय कीमतों के संकेतों को दबा देते हैं, वे ज़रूरी मांग प्रतिक्रिया को भी कमज़ोर कर देते हैं—जिसके परिणामस्वरूप वैश्विक ऊर्जा कीमतें बढ़ जाती हैं। और हम देशों के साथ मिलकर काम करेंगे, ताकि उनके राजकोषीय समर्थन को लक्षित करने और अस्थायी उपायों के लिए प्रभावी समापन प्रावधान तैयार करने में उनकी मदद की जा सके। ऐसा करते समय, हम इस बात पर भी ज़ोर देंगे कि राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों का एक-दूसरे की विपरीत दिशा में न चलना महत्वपूर्ण है।
पहले से ही, दुनिया ने बेंचमार्क प्रतिफल वर्क को बढ़ते हुए देखा है, जिससे ऋण की लागत बढ़ रही है (चित्र 11)। इस समय इस मिश्रण में घाटे से वित्तपोषित राजकोषीय प्रोत्साहन को जोड़ने से मौद्रिक नीति पर बोझ बढ़ेगा और ऐसे बदलावों में वृद्धि होगी। यह ऐसा होगा जैसे एक पैर एक्सेलेरेटर पर और दूसरा ब्रेक पर रखकर गाड़ी चलाना—जो अच्छा नहीं है।
जैसा कि हम अपने आगामी राजकोषीय मॉनिटर में जोर देंगे, दुनिया में राजकोषीय गुंजाइश की समस्या है। सार्वजनिक ऋण सामान्य तौर पर उससे बहुत अधिक है जितना कि 20 साल पहले था—जिसमें अधिकांश G20 देश भी शामिल हैं (चित्र 12)—जो उन अवधियों में राजकोषीय समेकन की व्यापक उपेक्षा को दर्शाता है जब परिस्थितियाँ इसकी अनुमति देती थीं।
परिणामस्वरूप, आय के सभी स्तरों पर राजस्व के हिस्से के रूप में ब्याज भुगतान बढ़ रहे हैं (चित्र 13)। निहितार्थ स्पष्ट है: सभी देशों को अपने सीमित राजकोषीय संसाधनों को जिम्मेदारी से तैनात करना चाहिए, और अधिकांश को इस झटके के बाद राजकोषीय गुंजाइश के पुनर्निर्माण के लिए निर्णायक रूप से आगे बढ़ना चाहिए। मैं इस बात पर जितना जोर दूँ उतना कम है।
अब मैं वित्तीय क्षेत्र की नीतियों पर आती हूँ। जैसा कि हमारी वैश्विक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट (Global Financial Stability Report) में जोर दिया जाएगा, यह आवश्यक है कि वित्तीय नियामक और पर्यवेक्षक सतर्क, चुस्त और बदलती स्थिति के प्रति उत्तरदायी रहें।
कुछ समय से वित्तीय स्थितियाँ अत्यधिक अनुकूल रही हैं, जो तकनीकी आशावाद और नए वित्तीय मध्यस्थों, जिनमें से कई गैर-बैंक हैं, द्वारा प्रेरित हैं। हालाँकि इससे विकास को बढ़ावा मिला है, इससे उलटाव का जोखिम भी पैदा होता है। उदाहरण के लिए, यदि निवेशकों को यह चिंता होने लगे कि ऊर्जा असुरक्षा, AI की भारी ऊर्जा आवश्यकताओं के कारण, उसके विकास को बाधित कर रही है, तो हम कठिन स्थिति में पड़ सकते हैं।
सूक्ष्म और स्थूल-विवेकपूर्ण नीतियों को ऐसे वित्तीय स्थिरता जोखिमों को कम करने के लिए काम करना होगा और एक लचीली प्रणाली सुनिश्चित करनी होगी।
इसके साथ, मैं सबसे महत्वपूर्ण सबक पर जोर देना चाहती हूँ: अच्छी नीतियों से फर्क पड़ता है। ऐसी ताकतें हैं जिन्हें देश नियंत्रित नहीं कर सकते हैं, लेकिन उनके पास अपनी खुद की नीतियों और संस्थानों पर नियंत्रण है।
ध्यान रखें: आपके बुनियादी सिद्धांतों की ताकत और चपलता उस समय आपके लिए सबसे अच्छा बचाव है जब झटके आते हैं—और वे आएंगे।
और, जब आप वर्तमान झटके के लंबे समय के प्रभावों से निपटते हैं, तो प्रौद्योगिकी, जनसांख्यिकी, भू-राजनीति, व्यापार और जलवायु में बड़े वैश्विक परिवर्तनों को दिशा देना और बेहतर भविष्य का निर्माण करना न भूलें। आपके संरचनात्मक और विनियामक नीति विकल्प उत्पादकता और लंबे समय तक चलने वाले विकास को समर्थन देते हैं—और विकास की क्षमता स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
IMF में हमारे लिए, मजबूत नीतियां और संस्थान बनाने में आपका समर्थन करना, यह हमारा अस्तित्व का कारणहै। और, अग्निशामक के रूप में, संकट आने पर हम आपके लिए मौजूद हैं।
एक बार फिर, आइए दुनिया के कमज़ोर तेल आयातकों पर ध्यान केंद्रित करें, जिन्हें स्पेकुलेटिव ग्रेड में दर्जा दिया गया है (चित्र 14a), और आइए उन सभी देशों को नीले रंग में दर्शाएँ जिनके पास IMF समर्थित कार्यक्रम हैं (चित्र 14b)। ज़रूरत पड़ने पर हम इन कार्यक्रमों का विस्तार कर सकते हैं—और आप निश्चिंत रहें—अभी और भी कार्यक्रम आने बाकी हैं।
मध्य पूर्व युद्ध के प्रसार प्रभावों को देखते हुए, हम उम्मीद करते हैं कि IMF भुगतान-संतुलन सहायता की निकट-अवधि की मांग बढ़कर $20 बिलियन और $50 बिलियन के बीच कहीं हो जाएगी, जिसमें निम्न सीमा तब लागू होगी यदि युद्धविराम बना रहता है।
यहाँ दो बातें ध्यान देने योग्य हैं।। एक, यह सीमा बहुत अधिक होती यदि यह कई उभरती हुई बाजार अर्थव्यवस्थाओं— जिनमें कुछ सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं—ने दशकों से सुदृढ़ नीति-निर्माण नहीं किया होता। और दूसरा, हमारे पास इस झटके का सामना करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं।
तो, हाँ, हमारे 191 सदस्य देश ज़रूरत पड़ने पर वित्तीय सहायता के लिए हम पर भरोसा कर सकते हैं। और वे इस बात पर भी भरोसा कर सकते हैं कि हम उन्हें एक साथ लाकर अनिश्चितता के कोहरे के बीच आगे का रास्ता खोजने में मदद करेंगे। अगला सप्ताह इसी बारे में होगा।
धन्यवाद, और आइए मध्य पूर्व और हर जगह स्थायी शांति के लिए आशा करें—क्योंकि युद्ध वह सब छीन लेता है जिसके लिए हम काम करते हैं।